महिलाओं में क्षय रोग और बांझपन: कारण और उपचार

आमतौर पर, तपेदिक को फेफड़ों को संक्रमित करने वाली बीमारी माना जाता है। हालांकि, कभी-कभी संक्रमण जननांगों तक पहुँच जाता है और महिलाओं में बांझपन का कारण बनता है। जागरूकता की कमी के कारण भारत में जननांग टीबी के अधिकांश मामलों का पता बाद के चरण में चलता है। इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि बहुसंख्यक आबादी अभी भी मानती है कि तपेदिक केवल फेफड़ों की बीमारी है। हालांकि, तपेदिक एक जीवाणु के कारण होती है जो शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है।

इस प्रकार, इस गलत धारणा को दूर करना बहुत महत्वपूर्ण है कि जब माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (टीबी बैक्टीरिया) रक्तप्रवाह के माध्यम से फैलता है और जननांगों को संक्रमित करता है, तो यह जननांग तपेदिक का कारण बनता है। महिलाओं में, जीवाणु संक्रमण गर्भाशय की सबसे भीतरी परत, एंडोमेट्रियम को गंभीर रूप से पतला कर देता है। यह स्थिति एक महिला के लिए गर्भधारण करना बेहद कठिन बना देती है क्योंकि भ्रूण गर्भाशय की दीवार से चिपक नहीं पाता है।

जननांग तपेदिक से पीड़ित महिलाओं में से 70 प्रतिशत में गर्भाशय संबंधी असामान्यताएं पाई जाती हैं, उनमें से 90 प्रतिशत की फैलोपियन ट्यूब्स प्रभावित होती हैं, और 25 प्रतिशत मरीज अंडाशय में असामान्यताओं से पीड़ित होते हैं। महिला प्रजनन अंगों की इस क्षति के परिणामस्वरूप जननांग तपेदिक से पीड़ित महिलाओं में गर्भपात हो जाता है।

तपेदिक कैसे बांझपन का कारण बनता है?

अधिकांश मामलों में, जननांग क्षय रोग का निदान 15-40 आयु वर्ग की महिलाओं में किया जाता है। इस बीमारी के बारे में जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाओं को इसके बारे में गर्भपात के बाद ही पता चलता है। जब महिलाएं गर्भधारण करने के कृत्रिम तरीकों को आजमाने के लिए आईवीएफ क्लीनिक जाती हैं, तो उन्हें पता चलता है कि उनका गर्भाशय भ्रूण को धारण करने में असमर्थ है

कभी-कभी, तपेदिक पैदा करने वाले बैक्टीरिया शरीर में निष्क्रिय रहते हैं और कई दिनों बाद जननांगों में संक्रमण का कारण बनते हैं। महिलाओं में, बैक्टीरिया मुख्य रूप से फैलोपियन ट्यूब या गर्भाशय (एंडोमेट्रियम) को निशाना बनाते हैं, जिसपर भ्रूण को ले जाने और उसे बढ़ने के लिए पोषण प्रदान करने की जिम्मेदारी होती है। जननांग तपेदिक से पीड़ित महिलाओं में बांझपन की दर 60 80 प्रतिशत है, जो काफी अधिक है। बांझपन से बचने के लिए, मरीज को संक्रमण की शुरुआत में, यानी जब लक्षण दिखना शुरू हो जाएं, उपचार शुरू कर देना चाहिए।

 महिलाओं में बांझपन निम्नलिखित महिला प्रजनन अंगों में संक्रमण के कारण हो सकता है:

ट्यूबल संक्रमण: माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस फैलोपियन ट्यूब में सिलिअरी मूवमेंट को नुकसान पहुंचा सकता है, एकतरफा या दुतरफा ट्यूबल रुकावट या ट्यूब में बड़े पिंड का निर्माण, डिंब के निषेचन या भ्रूण के आरोपण को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। जननांग तपेदिक से पीड़ित 90 प्रतिशत महिलाओं में ट्यूबल क्षेत्र संक्रमित हो जाता है, जो बांझपन का कारण बनता है।

गर्भाशय में संक्रमण: जननांग तपेदिक से पीड़ित 70 प्रतिशत महिलाओं में गर्भाशय में संक्रमण विकसित हो जाता है। गर्भाशय की दीवार का टूटना, पतला होना और क्षतिग्रस्त होना (एशरमैन सिंड्रोम) महिलाओं में बांझपन के कुछ कारण हैं।

डिम्बग्रंथि संक्रमण: ऐड्हिशन (आसंजन), पिंड और सिस्ट का निर्माण ऐसे कई तरीके हैं जिनसे तपेदिक अंडाशय को प्रभावित कर सकता है। ये लक्षण अंडाशय के आंशिक रूप से या पूरी तरह नष्ट होने का कारण बन सकते हैं और इसकी सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं तथा महिलाओं में बांझपन का कारण बन सकते हैं।

जननांग क्षय रोग के लक्षण 

 महिलाओं में जननांग तपेदिक के लक्षण किसी भी अन्य गर्भाशय संक्रमण के समान ही होते हैं। चूंकि अधिकांश लोगों को इस बीमारी के बारे में पता नहीं होता, इसलिए वे शुरुआत में कभी भी चिकित्सा सहायता नहीं लेते हैं। अधिकांश मरीज़ केवल तभी डॉक्टर से परामर्श लेते हैं जब स्थिति खराब हो जाती है, या जब दंपत्ति गर्भधारण करने में असमर्थ हो जाते हैं। कुछ मामलों में, बाद के चरण में चिकित्सा सहायता लेने से गर्भाशय को पहले से ही हुई क्षति को दूर नहीं किया जा सकता है और इस प्रकार, स्थायी बांझपन हो सकता है। नीचे कुछ सामान्य लक्षण दिए गए हैं। 

  • आपके उत्सर्जन तंत्र से निकलने वाला डिस्चार्ज या स्राव साफ़ या खूनी हो सकता है और इससे बदबू आ सकती है।
  • पेशाब करते समय या संभोग के दौरान भी आपको दर्द महसूस हो सकता है।
  • जननांग तपेदिक आपके जननांगों के आसपास की त्वचा के लाल होने और सूजन का कारण बन सकती है।
  • बुखार और ठंड लगना, रात को पसीना आना, वजन कम होना, थकान और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है।
  • मरीज को जननांग में अल्सर, अनियमित सीमाओं वाला एक मजबूत, कठोर घाव हो सकता है।
  • मरीज को हल्का बुखार हो सकता है, जो 24 घंटे से अधिक समय तक बना रह सकता है।

जननांग क्षय रोग का उपचार

उपरोक्त लक्षणों के उभरने की स्थिति में, मरीज को संक्रमण की शुरुआत में ही डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। संक्रमण बढ़ने पर, पेट दर्द गंभीर हो सकता है, मासिक धर्म अनियमित हो जाएगा और मरीज को सीने में दर्द हो सकता है। इनमें से किसी भी लक्षण का सामना करने वाली किसी भी महिला को सुरक्षित रहने के लिए जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाना चाहिए। 

यदि समय पर निदान और उपचार किया जाए तो महिलाओं में बांझपन को ठीक किया जा सकता है। कई महिलाओं को डर होता है कि एक बार जननांग तपेदिक का निदान हो जाने के बाद, वे कभी गर्भधारण नहीं कर सकेंगी। हालांकि, ऐसा नहीं है। यदि डॉक्टर के निर्देशानुसार उपचार कराया जाए तो मरीज ठीक हो सकता है और उसके फिर से गर्भधारण करने की संभावना भी रहती है। हालांकि, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि बीमारी को दीर्घकालिक संक्रमण में बदलने से रोकने के लिए मरीज डॉक्टर द्वारा निर्धारित एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स पूरा करे।

सावधानी और सर्तकता

आमतौर पर, इस बीमारी का निदान करना कठिन होता है क्योंकि लक्षणों की अक्सर गलत व्याख्या की जाती है। इसलिए, उपचार शुरू करने से पहले कई परीक्षणों की आवश्यकता होती है। हालांकि, यदि आपमें इस चिकित्सीय स्थिति का निदान किया जाता है तो भी चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने और तत्काल चिकित्सा सहायता लेने से इसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन सर्तक रहने और कुछ सावधानियां रखने की जरूरत है क्योंकि यह बीमारी न केवल बाहरी कारकों से बल्कि व्यक्ति के रक्तप्रवाह से भी फैलती है। 

उपचार के उपाय 

एंटीट्यूबरकुलर कीमोथेरेपी: यह कीमोथेरेपी का एक छोटा कोर्स है जो मरीजों को छह से नौ महीने के लिए दिया जाता है।

प्रत्यक्ष रूप से देखा गया उपचार (लघु कोर्स): उपचार की इस पद्धति को इसकी कुशल और लागत प्रभावी उपचार सुविधाओं के कारण अत्यधिक अनुशंसित किया जाता है। इसमें, रिफैम्पिसिन (आर), आइसोनियाजिड (एच), पाइराजिनमाइड (जेड) और एथमब्युटोल (ई) दवाओं का दो महीने का कोर्स और रिफैम्पिसिन (आर) तथा आइसोनियाजिड (एच) दवाओं का दैनिक चार महीने का उपचार शामिल है। 

सर्जरी: कुछ मामलों में, असामान्य लक्षणों और असाधारण चिकित्सा स्थितियों के साथ, सर्जरी को भी उपचारात्मक उपाय के रूप में चुना जाता है।

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