कुपोषण और बचपन का क्षय रोग: कारण और रोकथाम

टीबी एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य चिंता है और बच्चे विशेष रूप से इस संक्रामक रोग के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं। विश्व में हर साल 90 लाख टीबी के मामलों में से 11 प्रतिशत बच्चों में पाए जाते हैं। विकासशील देशों में बच्चों में रुग्णता और मृत्यु दर के कई कारणों में से तपेदिक (टीबी) और कुपोषण प्रमुख हैं।

 कुपोषण तपेदिक को बढ़ावा देता है। इसके विपरीत, टीबी जैसी दीर्घकालिक सूजन संबंधी रोगों के कारण कुपोषण हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, कुपोषण बच्चों में फुफ्फुसीय यानी फेफड़ों से संबंधित टीबी के जोखिम कारकों को बढ़ाता है। कुपोषण विश्वभर में एक गंभीर समस्या है। बच्चों में कुपोषण के मामले में अफ्रीकी देशों के बाद भारत दूसरे स्थान पर है। हम जानते हैं कि कुपोषण और तपेदिक का संयोजन बहुत घातक है। भारत में पांच साल से कम उम्र की 33 प्रतिशत से अधिक मौतें कुपोषण से जुड़ी होती हैं। 

बच्चों में कुपोषण और क्षय रोग के कारण

  गरीबी, आहार संबंधी खराब आदतें, पाचन संबंधी स्थितियां, अवसाद और चिंता जैसी मानसिक स्थितियां, स्वच्छता की कमी और दीर्घकालिक विकार कुपोषण के प्रमुख कारण हैं। कुपोषण के ये कारक आपस में जुड़े हुए हैं जो बच्चों में टीबी के खतरे को बढ़ाते हैं। इन कारकों से बचाव या इन्हें ठीक कर के और बच्चों के पोषण को बेहतर बनाकर हम उनके समग्र स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं और बच्चों में टीबी के मामलों को कम कर सकते हैं

 सामान्य नियम के रूप में, टीबी के मरीजों की देखभाल में एक महत्वपूर्ण कदम मामलों का पता लगाना है; हालांकि, बच्चों में टीबी का काफी हद तक निदान नहीं हो पाता है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में टीबी के कुल मामलों में से केवल 31 प्रतिशत का ही निदान हो पाता है। टीबी के कारण मरने वाले बच्चों में से 96 प्रतिशत मौतें उनकी हो रही हैं जिनका कभी निदान ही नहीं हो पाता है।

बच्चों में कुपोषण और तपेदिक के लिए निवारक उपाय 

 बाल पोषण और टीबी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। कुछ प्रमुख रणनीतियां और उपाय जिन्हें लागू किया जा सकता है उनमें शामिल हैं:

स्तनपान को बढ़ावा देना: जीवन के पहले छह महीनों के लिए अपने शिशुओं को विशेष रूप से केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रोत्साहित करना और उन्हें समर्थन देना। और दो साल की उम्र तक उचित पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना, आवश्यक पोषक तत्व और एंटीबॉडी प्रदान कर सकता है जो बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं और उसकी टीबी के संक्रमण के खिलाफ रक्षा करते हैं।

पौष्टिक भोजन तक पहुंच में सुधार: यह सुनिश्चित करना कि बच्चों को प्रोटीन, विटामिन और खनिजों सहित आवश्यक पोषक तत्वों के साथ संतुलित आहार मिले, उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत किया जा सकता है और टीबी संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। इसमें खाद्य अनुपूरक कार्यक्रम, स्कूल भोजन कार्यक्रम और समुदाय-आधारित पोषण नीति जैसी पहल शामिल हो सकती हैं।

गरीबी उन्मूलन के उपाय: गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को लागू करना जो बाल पोषण के सामाजिक-आर्थिक निर्धारकों को संबोधित करते हैं, जैसे कि स्वच्छ पानी, स्वच्छता सुविधाएं और शिक्षा तक पहुंच प्रदान करना, गरीबी और टीबी के चक्र को तोड़ सकता है। इसमें सामाजिक सुरक्षा उपाय, आर्थिक सशक्तिकरण कार्यक्रम और सामुदायिक विकास पहल शामिल हो सकते हैं। बचपन में होने वाले क्षय रोग का बोझ बहुत अधिक है और इससे निपटने की जरूरत है।

स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता: देखभालकर्ताओं और समुदायों को बाल पोषण, स्तनपान और टीबी की रोकथाम के महत्व के बारे में शिक्षित करने से जागरूकता पैदा हो सकती है और उन्हें अपने बच्चे के पोषण और स्वास्थ्य के बारे में बेहतर विकल्प चुनने के लिए सशक्त बनाया जा सकता है। इसमें स्वास्थ्य संवर्धन अभियान, समुदाय-आधारित शिक्षा कार्यक्रम और विभिन्न मीडिया चैनलों के माध्यम से लक्षित संदेश शामिल हो सकते हैं। 

स्वास्थ्य और पोषण क्षेत्रों के बीच सहयोग: बाल पोषण और टीबी से निपटने के लिए स्वास्थ्य और पोषण क्षेत्रों के बीच प्रभावी सहयोग महत्वपूर्ण है। टीबी कार्यक्रमों में पोषण जांच, मूल्यांकन और उपचार की सही नीतियों को एकीकृत करना और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भी ऐसे ही प्रयास करना बच्चों में टीबी के प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण सुनिश्चित कर सकता है।

  टीबी नियंत्रण कार्यक्रमों के अभिन्न अंग के रूप में बाल पोषण को प्राथमिकता देकर और बहुआयामी दृष्टिकोण लागू करके, हम बच्चों में टीबी के बोझ को कम करने और उनके समग्र स्वास्थ्य व कल्याण में सुधार करने की दिशा में काम कर सकते हैं। बाल पोषण में निवेश न केवल टीबी की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि बच्चों के समग्र स्वास्थ्य और विकास के लिए भी जरूरी है, जिससे उनके लिए एक उज्जवल और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित हो सके।

 चूंकि कुपोषण, जो बच्चों में टीबी का कारण बनता है, ने वैश्विक ध्यानाकर्षण किया है, अब समय आ गया है कि जन स्वास्थ्य अधिकारियों और चिकित्सकों को टीबी और कुपोषण के सह-प्रसार के अद्वितीय तर्क को समझना चाहिए। समग्र रूप से समाज को बच्चों में इन समस्याओं के प्रति जागरूक होने और बच्चों में टीबी के खतरे से लड़ने के लिए एक साथ आने की जरूरत है।

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